नैदानिक सत्यापन
नैदानिक सत्यापन (CV) एक व्यवस्थित वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे नैदानिक अभ्यास में होम्योपैथिक औषधियों की चिकित्सीय उपयोगिता का मूल्यांकन और पुष्टि करने के लिए तैयार किया गया है। इस प्रक्रिया में होम्योपैथिक साहित्य में औषधि परीक्षण के दौरान दर्ज लक्षणों का कठोर, पद्धतिगत और पुष्टिकरणात्मक मूल्यांकन किया जाता है, जिसका उद्देश्य औषधि की रोगोत्पादकता की पुष्टि करना और इस प्रकार उसके चिकित्सीय उपयोग को बढ़ाना है। यह प्रक्रिया होम्योपैथी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह साक्ष्य-आधारित अभ्यास का समर्थन करती है तथा होम्योपैथिक मटेरिया मेडिका के आगे अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करती है।
वर्ष 1978 में अपनी स्थापना के बाद से, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) स्वदेशी, दुर्लभ और आंशिक रूप से परीक्षित होम्योपैथिक औषधियों पर बहुकेंद्रीय नैदानिक सत्यापन अध्ययन कर रही है, जिसमें वे औषधियाँ भी शामिल हैं जिनका पहली बार परीक्षण स्वयं CCRH द्वारा किया गया है। पात्र प्रतिभागियों को संबंधित संस्थानों के बाह्य रोगी विभागों (OPD) से अध्ययन में शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य औषधि परीक्षण के दौरान देखे गए या अन्य साहित्य में उल्लिखित औषधि के लक्षणों का नैदानिक सत्यापन करना है। इसके अतिरिक्त, वे नैदानिक लक्षण जो औषधि परीक्षण के दौरान प्रकट नहीं हुए थे, लेकिन औषधि के सेवन के बाद रोगियों में पूर्ण या आंशिक रूप से ठीक हुए, उन्हें भी दर्ज किया जाता है। प्रत्येक मामले के विशिष्ट लक्षणों का मूल्यांकन कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए मटेरिया मेडिका एवं रिपर्टोरियल इंडेक्स के अनुसार किया जाता है, जो औषधि परीक्षण के आंकड़ों और साहित्य में उपलब्ध लक्षणों पर आधारित है।
अब तक, विभिन्न औषधीय स्रोतों से संबंधित 126 होम्योपैथिक औषधियों का नैदानिक सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें 90 पादप-आधारित, 24 रासायनिक, 09 पशु-आधारित औषधियाँ, 02 नोसोड्स और 01 सारकोड शामिल हैं। पद्धतिगत कठोरता को और मजबूत करने के लिए, CCRH ने वर्ष 2018 में और बाद में वर्ष 2023 में अपने नैदानिक सत्यापन प्रोटोकॉल को संशोधित किया। इसमें मानकीकृत मूल्यांकन उपकरण शामिल किए गए, जिनमें नैदानिक परिवर्तनों के आकलन के लिए MYMOP स्केल, दैनिक जीवन पर उपचार के प्रभाव को मापने के लिए ORIDL तथा होम्योपैथिक प्रिस्क्रिप्शन और देखे गए परिवर्तनों के बीच कारणात्मक संबंध का मूल्यांकन करने के लिए MONARCH मानदंड शामिल हैं। इन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मापदंडों को अपनाने से निष्कर्षों की विश्वसनीयता, वैधता और सामान्यीकरण क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे होम्योपैथिक अनुसंधान में साक्ष्य निर्माण और अधिक मजबूत हुआ है।

वर्तमान में 10 होम्योपैथिक औषधियों, अर्थात् Benzinum nitricum, Cheiranthus cheiri, Coleus forskohlii, Cucurbita pepo, Cuscuta reflexa, Iberis amara, Justicia adhatoda, Lithium bromatum, Phyllanthus niruri और Yohimbinum का नैदानिक सत्यापन पूरे भारत में 15 अध्ययन स्थलों पर चल रहा है।

नैदानिक सत्यापन पूरा कर चुकी औषधियों का पुनःसत्यापन
होम्योपैथिक औषधियों के वैज्ञानिक साक्ष्य और चिकित्सीय उपयोगिता को और मजबूत करने के लिए, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) ने नैदानिक सत्यापन पूरा कर चुकी औषधियों के पुनःसत्यापन एवं प्रमाणीकरण हेतु एक परियोजना शुरू की है। इसके अंतर्गत चिन्हित नैदानिक स्थितियों में इन औषधियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा।
इस पहल के अंतर्गत, एलर्जिक राइनाइटिस के प्रबंधन में Allium sativum की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए एक बहुकेंद्रीय नैदानिक अध्ययन शीघ्र ही शुरू किया जाना प्रस्तावित है।
प्रकाशन:
पुस्तकें (07)
‘नैदानिक सत्यापन के माध्यम से होम्योपैथिक औषधियों का अध्ययन - एक नया दृष्टिकोण’ – खंड I – VII

शोध लेख
सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित: 26
CCRH की त्रैमासिक बुलेटिन में प्रकाशित (प्रारंभिक वर्षों में): 26
अध्ययन:
- पूर्ण किए गए अध्ययन: डाउनलोड करें
- चल रहे अध्ययन: डाउनलोड करें
- प्रकाशन (औषधि-वार): डाउनलोड करें
- प्रकाशन (पुस्तकें): डाउनलोड करें






.png)

.png)





