सूचना का अधिकार (RTI)
परिषद के मुख्यालय में एक RTI प्रकोष्ठ है, जिसका कार्य वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी द्वारा देखा जाता है तथा RTI अधिनियम, 2005 के अनुसार प्रथम अपीलीय प्राधिकारी संगठन के प्रमुख अर्थात महानिदेशक हैं। यह अधिनियम नागरिकों को लोक प्राधिकरणों के नियंत्रणाधीन सूचना तक पहुँच प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है, ताकि प्रत्येक लोक प्राधिकरण के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया जा सके। इसका उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना, सरकार के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना तथा हमारे लोकतंत्र को वास्तविक अर्थों में जनता के लिए कार्यशील बनाना है।
अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत, भारत का कोई भी नागरिक किसी "लोक प्राधिकरण" (सरकार के किसी निकाय या "राज्य के साधन") से सूचना का अनुरोध कर सकता है, जिसे शीघ्रता से अथवा तीस दिनों के भीतर उत्तर देना आवश्यक है। अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक लोक प्राधिकरण को अपने अभिलेखों का व्यापक प्रसार हेतु कम्प्यूटरीकरण करना तथा कुछ श्रेणियों की सूचनाओं को स्वप्रेरणा से प्रकाशित करना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को औपचारिक रूप से सूचना का अनुरोध करने की न्यूनतम आवश्यकता पड़े। रिपोर्टिंग वर्ष (2024-25) के दौरान एक सौ सड़सठ [167] RTI आवेदन तथा पच्चीस [25] RTI अपीलें प्राप्त हुईं और उनका निस्तारण किया गया।






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