नैदानिक अनुसंधान
होम्योपैथी में नैदानिक अनुसंधान, होम्योपैथिक औषधियों, प्रक्रियाओं और उपचार पद्धतियों की सुरक्षा, प्रभावकारिता एवं प्रभावशीलता के संदर्भ में वैज्ञानिक प्रमाण उत्पन्न करने, उनका सत्यापन करने और उन्हें सुदृढ़ करने में सहायता करता है। ये अनुसंधान विभिन्न रोगों की रोकथाम एवं उपचार, हितधारकों के लिए निर्णय लेने तथा नैदानिक देखभाल में सुधार करने में उपयोगी हो सकते हैं। इसका उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक मानकों (डबल-ब्लाइंडिंग, वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन मानदंड, सांख्यिकीय विश्लेषण आदि) पर आधारित साक्ष्य-आधारित परीक्षण करना है, ताकि होम्योपैथी के सिद्धांतों से कोई विरोधाभास न हो। राष्ट्रीय स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण रोगों में होम्योपैथिक औषधियों के नैदानिक मूल्यांकन पर विशेष जोर दिया जाता है, विशेष रूप से उन रोगों में जिनका पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में कोई उपचारात्मक इलाज उपलब्ध नहीं है; देश के कुछ भागों में पाए जाने वाले स्थानिक रोगों तथा तथाकथित शल्य-चिकित्सीय रोगों में भी इनका मूल्यांकन किया जाता है।
परिषद की प्रमुख गतिविधियों में से एक होने के कारण, नैदानिक अनुसंधान ने संभावित अवलोकनात्मक अध्ययनों से लेकर स्वर्ण-मानक यादृच्छिक नियंत्रित अध्ययनों तक की यात्रा की है। वैज्ञानिक सलाहकार समिति (SAC) के मार्गदर्शन के अनुसार समय-समय पर विभिन्न रोगों में अध्ययन किए जाते हैं। प्रारंभिक चरण में, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श से विकसित प्रोटोकॉल के आधार पर कुछ चुनिंदा औषधियों की चिकित्सीय उपयोगिता निर्धारित करने के लिए बहुकेंद्रीय नैदानिक अध्ययन किए गए। इन विशेषज्ञों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (NICD), राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के विशेषज्ञ तथा प्रतिष्ठित होम्योपैथिक शिक्षक एवं शोधकर्ता शामिल थे। वर्तमान में समय की आवश्यकता के अनुसार होम्योपैथिक उपचार की प्रभावशीलता स्थापित करने के लिए यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (RCT) किए जा रहे हैं। इन अध्ययनों के परिणाम समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जाते हैं।
अब तक परिषद ने विभिन्न रोगों पर 238 अध्ययन किए हैं, जिनमें से 195 अध्ययन पूर्ण हो चुके हैं (154 अवलोकनात्मक अध्ययन और 41 यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण)। वर्तमान में 5 अध्ययन चल रहे हैं। नैदानिक अध्ययनों की प्रमुख उपलब्धियों में HIV/AIDS, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, क्रॉनिक साइनसाइटिस, इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी, सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया, तीव्र बवासीर, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में दर्द प्रबंधन, यूरोलिथियासिस, बच्चों में तीव्र राइनाइटिस, तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम, कोविड-19, तीव्र ओटिटिस मीडिया, उच्च रक्तचाप तथा डेंगू के कारण होने वाली थ्रोम्बोसाइटोपीनिया शामिल हैं।

नैदानिक अनुसंधान अध्ययन
i) पूर्ण किए गए अध्ययन : डाउनलोड
ii) चल रहे अध्ययन : डाउनलोड
iii) नैदानिक अनुसंधान प्रकाशन : डाउनलोड






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