भावी दृष्टि
क्लिनिकल रिसर्च यूनिट (होम्योपैथी), आइजोल का उद्देश्य मिजोरम तथा व्यापक उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में नैदानिक अनुसंधान, जन-स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक क्षमता-विकास के लिए एक सुदृढ़, विश्वसनीय और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी केंद्र के रूप में विकसित होना है।
कार्ययोजना
- मिजोरम की वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान विकसित करना
इकाई स्थानीय रूप से महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर उन्हें सुव्यवस्थित नैदानिक, महामारी-विज्ञान संबंधी और जन-स्वास्थ्य अनुसंधान में परिवर्तित करेगी। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उच्च रक्तचाप, श्वसन एवं जठरांत्र संबंधी विकार, त्वचा रोग, मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित विकार, मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्थानिक रोग, जीवनशैली से संबंधित रोग तथा मिजोरम के लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल होंगी।
- इकाई को उच्च-गुणवत्ता वाले नैदानिक अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करना
इकाई वैज्ञानिक, नैतिक और नियामक मानकों के अनुरूप क्रमिक रूप से यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण, प्रेक्षणात्मक अध्ययन, सर्वेक्षण, प्रकरण-आधारित अनुसंधान तथा सहयोगात्मक परियोजनाएं संचालित करेगी। इसका उद्देश्य ऐसा विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उत्पन्न करना होगा जो नैदानिक अभ्यास, जन-स्वास्थ्य योजना और परिषद के राष्ट्रीय अनुसंधान उद्देश्यों में सार्थक योगदान दे सके।
- अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित समुदायों तक पहुंचना
मिजोरम के दूरस्थ और अपेक्षाकृत कम सेवायुक्त क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर, स्क्रीनिंग कार्यक्रम, जागरूकता गतिविधियां और अनुवर्ती सेवाएं आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों को केवल एक-दिवसीय शिविर के रूप में नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को समझने, रोगों की शीघ्र पहचान, स्वास्थ्य-जागरूकता बढ़ाने तथा भविष्य के अनुसंधान क्षेत्रों को निर्धारित करने के अवसर के रूप में विकसित किया जाएगा।
- राज्य के भीतर स्थायी संस्थागत सहयोग विकसित करना
इकाई राज्य आयुष निदेशालय, सिविल अस्पताल आइजोल, चिकित्सा एवं शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, जन-स्वास्थ्य एजेंसियों, सामुदायिक संगठनों और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ सहयोग को मजबूत करेगी। ऐसे सहयोग से रोगी रेफरल, प्रयोगशाला सहायता, प्रशिक्षण, आंकड़ा-संग्रह तथा बहुविषयक अनुसंधान के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।
- उत्तर-पूर्व के युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर उत्पन्न करना
इकाई चिकित्सकों, प्रशिक्षुओं, विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अनुसंधान-अनुभव प्रदान करने वाले स्थानीय मंच के रूप में कार्य करेगी। नैदानिक अनुसंधान पद्धति, अनुसंधान नैतिकता, वैज्ञानिक लेखन, प्रोटोकॉल निर्माण और आंकड़ा-विश्लेषण पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि अनुसंधान क्षमता केवल दूरस्थ संस्थानों तक सीमित न रहकर क्षेत्र के भीतर विकसित हो।
- विश्वसनीय क्षेत्रीय स्वास्थ्य जानकारी विकसित करना
इकाई मिजोरम में रोगों के स्वरूप, उपचार परिणामों, स्वास्थ्य व्यवहार और अपूर्ण स्वास्थ्य आवश्यकताओं से संबंधित व्यवस्थित आंकड़े तैयार करने की दिशा में कार्य करेगी। ऐसे आंकड़े परिषद और राज्य सरकार को प्राथमिकताएं निर्धारित करने, कार्यक्रम तैयार करने और क्षेत्र के लिए प्रमाण-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकते हैं।
- वैज्ञानिक संचार और जन-सहभागिता को सुदृढ़ करना
अनुसंधान निष्कर्षों का प्रसार पीयर-रिव्यूड प्रकाशनों, वैज्ञानिक सम्मेलनों, सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों, द्विभाषी स्वास्थ्य-शिक्षा सामग्री और उत्तरदायी डिजिटल संचार के माध्यम से किया जाएगा। इकाई अनुसंधान संबंधी जानकारी को रोगियों, परिवारों, चिकित्सकों और सामान्य जनता के लिए सरल एवं सुलभ बनाने का भी प्रयास करेगी।
- निरंतरता, जवाबदेही और मापनीय विकास सुनिश्चित करना
इकाई अनुसंधान, प्रकाशन, रोगी सेवाओं, आउटरीच कार्यक्रमों, सहयोग और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करेगी। प्रगति का नियमित दस्तावेजीकरण और समीक्षा की जाएगी, ताकि इकाई का विकास पारदर्शी, मापनीय और परिषद के अधिदेश के अनुरूप बना रहे।
इस दृष्टि का उद्देश्य केवल इकाई द्वारा आयोजित गतिविधियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिजोरम के लोगों के पास राज्य के भीतर एक स्थायी और उत्तरदायी अनुसंधान संस्था उपलब्ध हो—ऐसी संस्था जो उनकी भौगोलिक परिस्थितियों, संस्कृति, स्वास्थ्य समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को समझे तथा उन आवश्यकताओं को वैज्ञानिक प्रश्नों, सार्थक सेवाओं, विश्वसनीय प्रमाणों और उचित जन-स्वास्थ्य कार्रवाई में परिवर्तित कर सके।
मिजोरम में इकाई की निरंतर संस्थागत उपस्थिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व केवल क्षेत्र से बाहर एकत्र किए गए आंकड़ों अथवा बाहर लिए गए निर्णयों के माध्यम से न हो, बल्कि स्थानीय सहभागिता, स्थानीय समझ और दीर्घकालिक उत्तरदायित्व के साथ क्षेत्र के भीतर किए गए अनुसंधान के माध्यम से हो।